छत्तीसगढ़ (कोरबा): वन मंडल कोरबा और कटघोरा के जंगलों में हाथियों की धमक से एक बार फिर दहशत का माहौल है। कुदमुरा रेंज में दो दिन बाद एक खतरनाक दंतैल हाथी धरमजयगढ़ से वापस लौट आया है, जिसे गुरुवार को चचिया के जंगलों में देखा गया। वहीं, दूसरी ओर 9 हाथियों का एक बड़ा झुंड करतला रेंज से होते हुए पसरखेत के केराकछार पहुंच चुका है।
हाथियों की इस अप्रत्याशित मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के 19 गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। 10 प्रमुख गांवों में बकायदा मुनादी (मुनादी कराकर लाउडस्पीकर से घोषणा) कराई गई है और ग्रामीणों को बेहद सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।
लगातार लोकेशन बदल रहे हाथी, ‘दंतैल’ से सबसे ज्यादा खतरा
वन अधिकारियों के मुताबिक, हाथियों का झुंड अब एक ही स्थान पर ज्यादा समय नहीं रुक रहा है, जिससे उनकी सटीक लोकेशन ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। सबसे बड़ा खतरा अकेले घूम रहे दंतैल हाथी से है। चचिया क्षेत्र करतला और पसरखेत रेंज के बिल्कुल बीच में स्थित है, जिसके कारण दंतैल किसी भी दिशा में आगे बढ़ सकता है।
🌾 खेती का सीजन बढ़ा रहा है ग्रामीणों की चिंता
चूंकि अभी खेती-किसानी का समय चल रहा है, इसलिए ग्रामीण सुबह-सुबह ही खेतों और जंगलों की तरफ रुख कर लेते हैं। वन विभाग ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है:
“ग्रामीण दिन के समय भी जंगल के बीच जाने से बचें। पिछले सप्ताह ही हाथियों के झुंड से सामना होने पर एक ग्रामीण को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सतर्कता ही एकमात्र उपाय है।”
कटघोरा मंडल में बिखरा 48 हाथियों का दल
इधर, वन मंडल कटघोरा के जटगा रेंज में सक्रिय 48 हाथियों का विशाल दल अब छोटे-छोटे समूहों में बंट गया है। ये हाथी फिलहाल केंदई, पसान और एतमानगर रेंज के घने जंगलों के भीतर घूम रहे हैं। राहत की बात यह है कि अभी तक इस क्षेत्र से किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन जंगल के बीच में खेत होने के कारण हाथियों और इंसानों के आमने-सामने होने का खतरा लगातार मंडरा रहा है।
वन विभाग की अपील: किसी भी ग्रामीण को यदि हाथी या हाथियों का झुंड दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना नजदीकी वन चौकी या वन रक्षकों को दें। हाथियों के नजदीक जाने या उन्हें उकसाने की गलती बिल्कुल न करें।

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