कोरबा | जिले के शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की बड़ी लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती का मामला सामने आया है। एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को लाने-ले जाने के लिए उपयोग की जा रही तीन नई बसें पिछले छह महीनों से बिना पंजीयन नंबर (Registration Number) के सड़कों पर दौड़ रही हैं। ताज्जुब की बात यह है कि परिवहन और यातायात विभाग भी इस गंभीर उल्लंघन पर मौन साधे हुए हैं।
1 करोड़ की लागत, पर सुरक्षा पर ‘प्रश्नचिन्ह’
झगरहा स्थित मेडिकल कॉलेज में छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए SECL गेवरा ने CSR मद से लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से तीन बसें उपलब्ध कराई हैं। इन बसों की खरीदी की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी गई थी। बसें प्रबंधन को मिले आधा साल बीत चुका है, लेकिन अब तक इनका विधिवत पंजीकरण नहीं हो सका है।
क्यों अटकी है प्रक्रिया?
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि वे शासकीय वाहन सीरियल क्रमांक (CG 02) का इंतजार कर रहे हैं।
- प्रक्रिया: प्रबंधन के अनुसार आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
- कारण: शासन स्तर पर नंबर जारी करने में देरी हो रही है।
- लाभ: शासकीय नंबर मिलने से परिवहन शुल्क और अन्य सरकारी टैक्स में छूट मिलती है, जिससे कॉलेज पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है।
जोखिम में 400 से अधिक छात्र
वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 125 सीटों पर प्रवेश के साथ कुल छात्र संख्या 400 से अधिक हो चुकी है। हॉस्टल की कमी के कारण छात्रों को पीजी कॉलेज और सुभाष चौक स्थित हॉस्टल में ठहराया गया है।
बड़ा सवाल: यदि बिना पंजीयन के चल रही इन बसों के साथ कोई अनहोनी या दुर्घटना हो जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? बिना नंबर के वाहनों का बीमा और अन्य कानूनी औपचारिकताएं भी अधर में रहती हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
कॉलेज को शुरू हुए चार साल बीत जाने के बाद भी बुनियादी ढांचे का काम अधूरा है।
- छात्रावास: समय पर हॉस्टल भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
- परिवहन: बसें तो मिलीं, लेकिन कागजी कार्रवाई के अभाव में वे नियम विरुद्ध चल रही हैं।
- पीजी कोर्स: इसी सत्र से स्नातकोत्तर (MD/MS) की 13 सीटों पर भी प्रवेश शुरू हो गया है, जिससे संसाधनों पर दबाव और बढ़ गया है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इस मामले में कब जागता है या किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है।

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