कोरबा | समाचार सेवा कोयला खदानों में अब कोयले के स्टॉक की जांच पारंपरिक तरीकों के बजाय हाईटेक मशीनों से की जाएगी। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) अपनी अनुषंगी कंपनियों में पारदर्शिता लाने और कोयले की चोरी रोकने के लिए थ्रीडी लेजर स्कैनर और न्यूक्लियर डेंसिटो मीटर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने जा रही है।
पारदर्शिता के लिए ‘न्यू येलो बुक’ में बदलाव
कोल इंडिया बोर्ड ने तकनीकी विकास को देखते हुए अपने पुराने मापन नियमों (सितंबर 2011 की येलो बुक) को अपडेट किया है। इसके लिए CMPDI के निदेशक की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को लागू कर दिया गया है। अप्रैल 2026 से इन नए नियमों के तहत स्टॉक की माप शुरू हो गई है।
इन तकनीकों का होगा इस्तेमाल:
स्टॉक की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए अब निम्नलिखित उपकरणों और विधियों का प्रयोग होगा:
- थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर: ढेर की सटीक बनावट और आयतन की गणना के लिए।
- एयरबोर्न लेजर स्कैनर: हवाई सर्वेक्षण के जरिए बड़े इलाकों का आकलन।
- इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन: भौगोलिक मापन के लिए।
- वैज्ञानिक सॉफ्टवेयर: वॉल्यूम की गणना अब मानवीय हस्तक्षेप के बिना सीधे सॉफ्टवेयर से होगी।
कन्वर्जन फैक्टर और कड़े नियम
कोयले के घनत्व और वजन के अनुपात (Conversion Factor) का निर्धारण अब हर तीन साल में अनिवार्य रूप से किया जाएगा। यदि कोयले का ग्रेड बदलता है या नया ढेर बनता है, तो उसकी गणना तत्काल प्रभाव से की जाएगी। ढीले स्टॉक के लिए ‘टीपरो’ (Tipero) विधि से वजन-आयतन अनुपात निकाला जाएगा।
कोयला चोरी और ओवर-रिपोर्टिंग पर लगेगा लगाम
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कोयले की ओवर-रिपोर्टिंग (कागजों पर अधिक कोयला दिखाना) और खदानों से होने वाली चोरी को रोकना है। तकनीक के आने से मानवीय त्रुटि की गुंजाइश खत्म होगी और रियल-टाइम डेटा उपलब्ध होगा। अधिकारियों पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी ताकि कंपनियों को होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके।
विशेष निगरानी के लिए उठाए गए कदम:
- स्टॉक जांच की पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य वीडियो रिकॉर्डिंग होगी।
- तौल पर्चियों और फील्ड नोट्स पर समिति के सभी सदस्यों और वे-ब्रिज प्रभारी के हस्ताक्षर जरूरी होंगे।
- सभी मापों को आधिकारिक मेजरमेंट बुक (MB) में दर्ज करना होगा।

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