कोरबा | न्यूज़ डेस्क 17 मई 2026
कोरबा। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) संकट के चलते देश में ईंधन संकट गहराने की आशंका के बीच एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम जनता से डीजल और पेट्रोल का सीमित उपयोग करने की भावुक अपील की है, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन तिहार’ के नाम पर आयोजित हो रहे जन समस्या निवारण शिविरों में हजारों लीटर ईंधन पानी की तरह बहाया जा रहा है। मुख्यमंत्री का उड़नखटोला और अधिकारियों की गाड़ियों का लंबा काफिला अब जनचर्चा और आलोचना का विषय बन गया है।
पीएम ने काफिला किया छोटा, यहाँ उड़ रहा ‘उड़नखटोला’
चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन बचत की मुहिम की शुरुआत खुद से करते हुए अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाकर केवल दो कर दी है। उन्होंने देश के सामने एक मिसाल पेश की है, लेकिन प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय और उनका प्रशासनिक अमला इस अपील को तवज्जो देता नजर नहीं आ रहा।
शनिवार को कोरबा ब्लॉक के दूरस्थ और वनांचल ग्राम लेमरू में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खुद हेलीकॉप्टर (उड़नखटोला) से पहुंचे। हेलीकॉप्टर और सीएम की अगुवानी में लगे दर्जनों वीआईपी वाहनों के काफिले के कारण सैकड़ों लीटर ईंधन की खपत हो गई।
वनांचल की मजबूरी या टल सकता था आयोजन?
जानकारों का कहना है कि कोरबा का लेमरू क्षेत्र पूरी तरह वनांचल है। ऐसे में दूर-दराज के इलाकों से अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता के लिए बिना वाहनों के शिविर स्थल तक पहुंचना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। यही वजह रही कि शिविर के बहाने निजी और सरकारी, दोनों स्तरों पर पेट्रोल-डीजल की भारी खपत हुई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब देश पर ईंधन संकट का खतरा मंडरा रहा है और खुद पीएम बचत की अपील कर रहे हैं, तो ऐसे में हालात सामान्य होने तक ‘सुशासन तिहार’ जैसे बड़े आयोजनों को टाला जा सकता था। लोगों के मुताबिक, सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
जनता की आवाज: “एक तरफ हमसे तेल बचाने को कहा जा रहा है, दूसरी तरफ पेट्रोल पंपों पर लाइनें लगी हैं। ऐसे में सुशासन के नाम पर हजारों लीटर ईंधन फूंकने का क्या औचित्य है?”
प्रशासन के दावे बनाम जमीनी हकीकत
ईंधन की किल्लत को लेकर अब प्रशासन और जनता के बीच विरोधाभास की स्थिति है:
विषय प्रशासनिक दावा जमीनी हकीकत (जनता का पक्ष)
ईंधन की उपलब्धता जिले में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। नियमित आपूर्ति न होने से कई पेट्रोल पंप ‘ड्राई’ (खाली) हो चुके हैं।
पंपों पर स्थिति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में है। पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी लंबी कतारें लग रही है
फिलहाल, सुशासन के इस उत्सव में उड़ते हेलीकॉप्टर और दौड़ती गाड़ियों ने बिलासपुर से लेकर कोरबा तक राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

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