कोरबा। जिले के शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष (यूजी प्रथम सेमेस्टर) की पहली मेरिट सूची जारी होते ही प्रवेश प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। इस वर्ष सबसे खास बात यह रही कि 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों ने शहर के प्रमुख कॉलेजों को अपनी पहली प्राथमिकता दी है।
परिणामस्वरूप, बीकॉम सहित कई लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में कटऑफ पिछले वर्षों की तुलना में काफी ऊंचा पहुंच गया है। इस वर्ष की प्रवेश सूची ने यह साफ कर दिया है कि कोरबा के प्रतिष्ठित महाविद्यालयों में दाखिला अब केवल अच्छे नहीं, बल्कि उत्कृष्ट अंक लाने वाले विद्यार्थियों को ही मिल पा रहा है।
प्रमुख बिंदु: कॉलेज परिसरों में दिखा उत्सव जैसा माहौल
दस्तावेजों की जांच और फीस काउंटर पर कतारें: महाविद्यालयों द्वारा प्रथम सेमेस्टर की मेरिट सूची जारी करते ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। कॉलेज परिसरों में सुबह से ही विद्यार्थियों और अभिभावकों की भारी भीड़ देखने को मिली।
खुशी और इंतजार का माहौल: कोई मेरिट सूची में अपना नाम खोजता नजर आया तो कोई आवश्यक दस्तावेजों की जांच और फीस जमा कराने में व्यस्त रहा। कई विद्यार्थियों के चेहरे पर पहली पसंद के कॉलेज में प्रवेश मिलने की खुशी दिखी, वहीं कुछ छात्र-छात्राएं कटऑफ अधिक होने के कारण अगली मेरिट सूची का इंतजार करते दिखाई दिए।
वाणिज्य संकाय (Commerce) में सबसे कड़ी टक्कर
इस वर्ष वाणिज्य संकाय में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। शहर के प्रमुख महाविद्यालयों में बीकॉम पाठ्यक्रम का कटऑफ 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया।
शासकीय पीजी कॉलेज और शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में सामान्य वर्ग के लिए बीकॉम का कटऑफ 93.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
इससे स्पष्ट है कि वाणिज्य विषय की मांग लगातार बढ़ रही है और छात्र भविष्य की रोजगार संभावनाओं को देखते हुए इस पाठ्यक्रम को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बाहर जाने के बजाय अब कोरबा पहली पसंद
पहले बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए बिलासपुर, रायपुर अथवा अन्य बड़े शहरों के कॉलेजों का रुख करते थे। लेकिन अब कोरबा के महाविद्यालयों में:
- बेहतर शैक्षणिक वातावरण,
- अनुभवी प्राध्यापक,
- आधुनिक सुविधाएं, और
- लगातार सुधरते परीक्षा परिणाम…
के कारण स्थानीय कॉलेजों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। यही कारण है कि जिले के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी मेधावी विद्यार्थी यहां प्रवेश लेने पहुंच रहे हैं।
अब दूसरी और तीसरी मेरिट सूची पर टिकी उम्मीदें
कटऑफ में हुई इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। जिन विद्यार्थियों के अंक 75 से 85 प्रतिशत के बीच हैं, उन्हें शहर के प्रतिष्ठित कॉलेजों की पहली सूची में स्थान नहीं मिल पाया है। ऐसे विद्यार्थियों की उम्मीदें अब दूसरी और तीसरी मेरिट सूची पर टिकी हुई हैं। फिलहाल, महाविद्यालयों द्वारा चयनित विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) कर प्रवेश दिया जा रहा है।

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