कोरबा। छत्तीसगढ़ की ऊर्जा धानी (पावर हब) कहे जाने वाले कोरबा जिले से पूरे देश और राज्य को बिजली सप्लाई की जाती है, लेकिन विडंबना देखिए कि इसी पावर हब के लोग आज खुद घोर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। बार-बार हो रही ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती ने स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का जीना मुहाल कर दिया है। भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली गुल रहने से लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है।
उत्पादन में नंबर-1, वितरण में ‘फेल’
कोरबा बिजली उत्पादन के मामले में देश का अग्रणी जिला है, लेकिन बिजली वितरण के मामले में इसकी स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। लचर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के कारण गर्मियों से शुरू हुई पावर ट्रिपिंग की समस्या मानसून के आगमन तक लगातार बनी हुई है। दिन में दर्जनों बार बिजली गुल होने से:
- घरेलू जीवन: पंखे और कूलर बंद होने से लोग भीषण गर्मी में तड़पने को मजबूर हैं।
- कृषि: खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पंप बिजली न रहने से बंद पड़े हैं।
- व्यवसाय और शिक्षा: लगातार हो रही कटौती से छात्रों की पढ़ाई और व्यापारियों का धंधा चौपट हो रहा है।
आंधी-तूफान के बाद ब्लैकआउट; लो-वोलटेज की दोहरी मार
बिजली आपूर्ति ठप होने के पीछे कई बुनियादी कारण सामने आ रहे हैं। कई इलाकों में लोड बढ़ने से ट्रांसफार्मर जल रहे हैं, तो कहीं कम क्षमता के ट्रांसफार्मर होने के कारण लो-वोल्टेज की बड़ी समस्या बनी हुई है। मौसम बदलते ही या हल्की आंधी-तूफान आते ही पूरी आपूर्ति व्यवस्था तितर-बिटर हो जाती है और शहर से लेकर गांव तक अंधेरे में डूब जाते हैं।
जनप्रतिनिधियों के मौन पर उठे सवाल:
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा पर भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मौन साधे हुए हैं। लगातार हो रही इस समस्या के खिलाफ जनप्रतिनिधियों को आगे आकर जनता की लड़ाई लड़नी चाहिए। न्यू अमरैय्यापारा के लोगों ने बताया कि लो-वोल्टेज की शिकायत के बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं देते।
सड़कों पर उतरने की तैयारी में व्यापारी और ग्रामीण
लगातार हो रही बिजली कटौती से तंग आकर अब लोगों का सब्र का बांध टूट रहा है:
- व्यापारियों की चेतावनी: चेंबर ऑफ कॉमर्स और स्थानीय व्यापारियों ने बिजली अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था सुधारने की मांग की है। सुधार न होने पर कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी गई है।
- कुदमुरा और बरपाली में आक्रोश: कुदमुरा क्षेत्र में ग्रामीणों ने चक्काजाम की चेतावनी दी थी, जिसे अधिकारियों द्वारा व्यवस्था सुधारने के खोखले आश्वासन के बाद फिलहाल टाला गया है। बरपाली में भी लोगों का गुस्सा फूट चुका है।
अधिकारी नहीं उठाते फोन, कॉल सेंटर रहता है ‘इंगेज’
उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली गुल होने पर जब वे फ्यूज कॉल सेंटर में संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो या तो फोन रिसीव नहीं होता या फिर नंबर लगता ही नहीं। आंधी-तूफान के समय जब ब्लैकआउट की स्थिति बनती है, तो कॉल सेंटर के फोन को जानबूझकर इंगेज (रिसीवर उठाकर) रख दिया जाता है। जिम्मेदार अधिकारी भी इस संकट के समय आम जनता का फोन उठाना मुनासिब नहीं समझते।

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