कोरबा | वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या, जिसे ‘सतुवई अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है, आज श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन न केवल पितरों की शांति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बदलती ऋतु में स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष स्थान रखता है।
शुभ मुहूर्त और तिथियां
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल की रात 8:11 बजे से हो चुकी है, जो 17 अप्रैल की शाम 5:21 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के कारण यह पर्व आज मनाया जा रहा है।
- अमृत काल मुहूर्त: सुबह 9:50 से 11:18 बजे तक।
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे तक (दान-पुण्य और अनुष्ठान के लिए श्रेष्ठ)।
धार्मिक महत्व: पितरों का तर्पण और पुण्य लाभ
सतुवई अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि:
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ‘ऊं पितृभ्य: नम:’ मंत्र के साथ जल और काला तिल अर्पित करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं।
- पवित्र नदी में स्नान या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से पापों का शमन होता है।
- भगवान सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य देना सौभाग्यकारी माना गया है।
सेहत और दान का संगम: सत्तू की परंपरा
भीषण गर्मी की शुरुआत को देखते हुए इस दिन ठंडी तासीर वाली वस्तुओं के दान का विशेष फल मिलता है।
विशेष परंपरा: मिट्टी के कलश में पानी भरकर, उसके ऊपर पात्र में सत्तू रखकर दान करना ‘श्रेयस्कर’ माना जाता है। इसके अलावा कच्चे आम, पंखे, मौसमी फल और वस्त्रों का दान भी शुभ है।
वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य दृष्टिकोण
धार्मिक पहलू के साथ-साथ सतुवई अमावस्या का स्वास्थ्य से गहरा संबंध है। सत्तू का सेवन शरीर को भीतर से ठंडक प्रदान करता है और बढ़ते तापमान के बीच शारीरिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यही कारण है कि आज के दिन से सत्तू खाने की औपचारिक शुरुआत की जाती है।

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