रायपुर: भारतीय जनाधिकार पार्टी (छत्तीसगढ़) के संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे ने राज्य के बजट 2026-27 को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा प्रस्तुत बजट को “छलावा” करार देते हुए कहा कि चुनाव के समय दी गई “मोदी की गारंटी” अब केवल फाइलों तक सिमट कर रह गई है। श्री दुबे ने आरोप लगाया कि विष्णु देव साय सरकार ने घोषणाओं की झड़ी तो लगा दी है, लेकिन धरातल पर क्रियान्वयन और जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है।
किसान और युवा: केवल वादे, समाधान नहीं
श्री दुबे ने कहा कि सरकार ने ₹3100 प्रति क्विंटल धान खरीदी का ढिंढोरा पीटा, लेकिन हकीकत यह है कि इस वर्ष हजारों किसान केंद्रों तक पहुँच ही नहीं पाए। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार किसान धान न बेच पाने के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सिंचाई विस्तार, भंडारण और कर्ज राहत के लिए बजट में कोई स्पष्ट रोडमैप क्यों नहीं है? वहीं, युवाओं के मुद्दे पर उन्होंने घेरा कि 1 लाख सरकारी नौकरियों का वादा करने वाली सरकार के पास न तो कोई भर्ती कैलेंडर है और न ही वर्षवार सूची। उन्होंने कहा, “युवा अब भाषणों से थक चुका है, उसे हाथ में नियुक्ति पत्र चाहिए।”
स्वास्थ्य और शिक्षा: बदहाली का आलम
प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जताते हुए दीपक दुबे ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में खून की जांच तक बंद है। 105 में से 50 प्रकार की जांचें बंद पड़ी हैं क्योंकि रिएजेंट और केमिकल की कमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य को जनसेवा के बजाय “लूट का उद्योग” बना चुकी है, जहाँ आम जनता निजी अस्पतालों के भारी बिलों के नीचे दब रही है। शिक्षा के क्षेत्र में भी भवनों की घोषणा तो हो रही है, लेकिन 35 हजार शिक्षकों और प्रोफेसरों की भर्ती पर सरकार मौन है।
महंगी बिजली और जल संकट का प्रहार
बजट में बिजली दरों में कटौती के बजाय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी है। श्री दुबे ने दावा किया कि 6000 करोड़ के घाटे का हवाला देकर दरों में भारी वृद्धि की आशंका है, जिससे स्टील उद्योग और आम जनता दोनों त्रस्त होंगे। पेयजल के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि कई जिलों में आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पीने से 200 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, लेकिन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ठप पड़े हैं।
आंकड़ों की बाजीगरी बनाम जमीनी हकीकत
मुख्यमंत्री द्वारा दावा की गई 11.57% विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि को श्री दुबे ने “चुनावी जुमला” करार दिया। उन्होंने पूछा कि जब बजट 76 हजार करोड़ से बढ़कर 1.75 लाख करोड़ हो गया है, तो फिर सरकार सार्वजनिक मंचों पर पैसा नहीं होने की बात क्यों करती है? आखिर यह भारी-भरकम पैसा जा कहाँ रहा है?
भारतीय जनाधिकार पार्टी की प्रमुख मांगें:
1 लाख सरकारी नौकरियों के लिए स्पष्ट भर्ती कैलेंडर जारी हो।
2 पिछले बजट की घोषणाओं पर श्वेत पत्र लाया जाए।
3 किसानों और कृषि-उद्योग के लिए समयबद्ध रोडमैप बने।
4 बिजली दरों की समीक्षा कर जनता को तत्काल राहत दी जाए।
दीपक दुबे ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन विषयों पर जवाबदेही तय नहीं करती है, तो प्रदेशभर में लोकतांत्रिक तरीके से उग्र जनआंदोलन किया जाएगा।

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