कोरबा/कटघोरा: जिले के जंगलों में हाथियों का बसेरा अब ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। वर्तमान में महुआ और चार-चिरौंजी के संग्रहण का सीजन है, लेकिन हाथियों की निरंतर मौजूदगी ने वनोपज पर निर्भर ग्रामीणों के मन में अनहोनी का डर पैदा कर दिया है।
जटगा में 49 हाथियों का विशाल दल
जानकारी के अनुसार, कटघोरा वनमंडल के जटगा रेंज में 49 हाथियों का झुंड लंबे समय से सक्रिय है। हाथियों को जिले का वातावरण इतना रास आ गया है कि वे यहां से जाने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त:
- कोरबा वनमंडल: पसरखेत परीक्षेत्र के केराकछार के पास 9 हाथियों का दल विचरण कर रहा है।
- बेबी एलीफेंट: इस दल में नन्हे हाथी भी शामिल हैं, जिसके कारण हाथियों की गति धीमी है और वे सुरक्षित स्थान मिलते ही वहीं डेरा जमा लेते हैं।
- केंदई रेंज: यहाँ दो दंतैल हाथी पिछले कुछ दिनों से रोदे पहाड़ और बनिया क्षेत्र के आसपास देखे गए हैं।
महुआ संग्रहण पर ‘दहशत’ का साया
ग्रामीण आमतौर पर पौ फटने (तड़के सुबह) से पहले ही महुआ बीनने जंगल निकल जाते हैं। अंधेरे में हाथियों की मौजूदगी का पता न चल पाना जानलेवा साबित हो सकता है। जटगा रेंज के कुकरीकाडर गांव के पास भी तीन हाथी झुंड से अलग होकर पहुंच गए थे, जिससे रात भर ग्रामीणों की सांसें अटकी रहीं।
वन विभाग अलर्ट: जारी की गई एडवाइजरी
राहत की बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई है। स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं:
- मुनादी: गांवों में लगातार मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
- समय में बदलाव: ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे सूर्योदय के बाद ही जंगल की ओर जाएं।
- पेट्रोलिंग: जटगा, पसान और केंदई रेंज में वनकर्मियों की टीम लगातार हाथियों की निगरानी कर रही है।
वन विभाग की अपील: “जंगल में जाते समय समूह में रहें और हाथियों के करीब जाने या उन्हें छेड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें।”

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