कोरबा | शहर सहित देशभर में अभी शादियों की धूम है, लेकिन अगले महीने से शहनाइयों की गूंज शांत होने वाली है। पंचांग की गणना के अनुसार, 17 मई से अधिमास (पुरुषोत्तम मास) शुरू हो रहा है, जो 15 जून तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में हिंदू धर्म में होने वाले तमाम मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।
क्यों लग रहा है मांगलिक कार्यों पर ब्रेक?
ज्योतिषियों के अनुसार, जब सूर्य की संक्रांति (राशि परिवर्तन) एक चंद्रमास के भीतर नहीं होती, तो उसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस बार यह ज्येष्ठ माह में पड़ रहा है, इसलिए इसे ‘अधि ज्येष्ठ मास’ भी कहा जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, यह समय भौतिक सुखों और शादी-विवाह जैसे आयोजनों के बजाय दान-पुण्य और परोपकार के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
त्योहारों के कैलेंडर में बड़ा बदलाव
अधिक मास की वजह से इस साल हिंदू वर्ष 2083 अब 13 महीनों का होगा। इसका सीधा असर आने वाले प्रमुख त्योहारों की तारीखों पर पड़ेगा। त्योहारों का कैलेंडर करीब 20 दिन आगे बढ़ गया है:
- रक्षाबंधन: अगस्त के अंतिम सप्ताह (28 अगस्त) को मनाया जाएगा।
- दीपावली: इस बार 8 नवंबर को मनाई जाएगी।
“सूर्य वर्ष 365 दिन 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिन का। इन दोनों के बीच हर साल करीब 11 दिन का अंतर आता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए हर 32-33 महीने में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।”— ज्योतिषीय गणना
मई के शुरुआती पखवाड़े में अंतिम मुहूर्त
शादी की खरीदारी और तैयारियों में जुटे लोगों के लिए मई का शुरुआती पखवाड़ा (15 मई तक) काफी व्यस्त रहने वाला है, क्योंकि इसमें विवाह के कई शुभ मुहूर्त हैं। 15 जून को अधिक मास समाप्त होने के बाद ही फिर से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकेगी।

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